Being a Human being, we are the child of nature. But through the journey of development we lost a sensitivity towards our mother - nature. For the Peace and hormonay of the world, we should go for our mother and strong our relationship with her.
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कैफियत
#कैफियत आदमी बड़ा हो चला है मजहबों से अब, यहाँ खुदा की नही, सिर्फ हैसियत उसकी। गढ़ लिये हैं अकीदों से कई बुत उसने, इबादतगाहों में फैली है ...
Teaching Skills for 21st Century in Indian Context
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मजहब और आदमी आदमी मजहब को इस तरह ढोता है, जैसे आदमी ने नहीं, मजहब ने आदमी को बनाया हो! आदमी ने अगर मजहब बनाया है, मजहब आदमी पर भारी क्यों ...
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#सनातन_हिन्दू_धर्म_में_ब्रह्म_की #अवधारणा (प्रथम भाग) सनातन हिन्दू धर्म से बाद विकसित होने वाले कुछ पंथ सनातन हिन्दू ...
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रास्ता मुश्किल है माना इस सफर का , देख लेंगे फिर चल के मंजिल-ए-मकसूद। हर कहीं फैले हुए हैं बस हवा के लोथड़े, जो बने बीनाई के अब हमसफर महदूद...

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